आ.शिवपूजन सहाय : जयंती 133
आ.शिवपूजन सहाय न्यास की पिछली 37 वीं बैठक श्री जियालल आर्य कि अध्यक्षता में
11 जनवरी, 1925 को बिहार विद्यापीठ, पटना हुई
थी, और उस बैठक में लिए गए निर्णयानुसार डा.मंगलमूर्त्ति द्वारा अंग्रेजी में लिखित
डा.राजेन्द्र प्रसाद की जीवनी का 11 जुलाई, 2025 पूर्वान्ह् 11 बजे माननीय
राज्यपाल(बिहार) श्री आरिफ़ मोहम्मद खान द्वारा लोकार्पण
हुआ। उस अवसर की कुछ तस्वीरें यहाँ देखी जा
सकती हैं।
न्यास के प्रमुख कार्यों में श्री आर.के.सिंह (पूर्व सांसद) द्वारा संकल्पित
उनवाँस ग्राम में आ.शिव के स्मारक निर्माण का काम उनके अचानक गंभीर रूप से अस्वस्थ
हो जाने से रुक गया है, यद्यपि स्मारक-स्थल पर 6.5 फुट ऊंची चहारदीवारी न्यास के द्वारा
बनवाई जा चुकी है, जिसका चित्र, विवरण आदि इसी ब्लॉग पर पहले दिया जा चुका है। इस दिशा
में अभी भी प्रयास चल रहा है।
आ. शिवजी कि स्मृति में न्यास निरंतर कार्यशील है, यद्यपि अपने वार्धक्य (89 वर्ष)
के कारण न्यास के संस्थापक सचिव के सामने अपनी स्वास्थ्यगत समस्याओं के कारण कई प्रकार
कि विवशताऐं आ गई हैं, जिनके कारण बार-बार पटना जाकर बैठकें करना कठिन हो गया है, ओर
अधितर कार्य फोन ओर नेट से करने पड़ रहे हैं। इस बीच आ.शिवजी के स्मृति-सम्मान में
दिल्ली, पटना आदि में कई समारोह अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित होते रहे हैं, और यह एक शुभ संकेत
है| इधर आ.शिवजी पर डा. मंगलमूर्त्ति-लिखित हिन्दी जीवनी ‘शिवपूजन सहाय:जीवन और साहित्य’
प्रकाशन विभाग (भारत सरकार) से प्रकाशित हुई है, जो सरकारी विक्रय केंद्रों ओर नेट
पर भी पर उपलब्ध है। दूसरी महत्त्वपूर्ण पुस्तक डा. मंगलमूर्त्ति-संपादित ‘शिवपूजन
सहाय: पुनरस्मरण’ (वैल्यू प्रकाशन, मो.9868035385) भी प्रकाशित हुई है जिसमें आ.शिवजी
पर उनके समकालीन साहित्यकारों के लगभग 75 संस्मरण प्रकाशित हैं| आ. शिवजी से सम्बद्ध
कुछ ऐसी पुस्तकों के चित्र इस ब्लॉग पर पहले भी प्रकाशित हैं, और इन नई किताबों के
चित्र यहाँ फिर प्रकाशित किए जा रहे हैं।
आ.शिवजी कि 133 जयंती के अवसर पर पटना और उनके जन्म-ग्राम उनवाँस में भी कुछ विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। उनके अमर ‘आंचलिक’ उपन्यास ‘देहाती दुनिया’ का यह शती-वर्ष है और उसका एक नया प्रामाणिक शती-संस्करण विशेष सामग्री के साथ शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है। ‘देहाती दुनिया’ का डा. मंगलमूर्त्ति-कृत अंग्रेजी अनुवाद भी शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है, ओर उसका औडियो तथा ई-बुक भी जल्दी ही प्रकाशित होगा। ‘देहाती दुनिया’ के कुछ और संस्करण (c) विधान के विपरीत कई प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किए जा रहे हैं, यद्यपि आ.शिवजी के साहित्य के व्यापक प्रचार की दृष्टि से अभी उनपर किसी कानूनी कार्रवाई का विचार न्यास नहीं कर रहा है। आ. शिव-लिखत समस्त साहित्य का सम्पूर्ण स्वतत्वाधिकार अब केवल न्यास का है और संस्थागत स्वत्वाधिकार के विषय में नेट पर जो सूचना मिली है उससे इस संस्थागत स्वतत्वाधिकार की पुष्टि होती है:
In India 60 yrs after death works become (c)free. But if a Trust is formed by inheritors vesting (c) in Trust what's the situation regarding (c). In estates formed for authors abroad what's the situation?In India, copyright typically expires 60 years after the creator's death, after which the work enters the public domain. However, if a Trust is formed by inheritors and copyright is vested in the Trust, the situation changes.
- *Trusts and Copyright*: When copyright is vested in a Trust, the Trust can continue to hold and manage the copyright, potentially extending the period of copyright protection. This means the work might not immediately enter the public domain.
- *Estates formed abroad*: For authors based abroad, the copyright laws of their country apply. Many countries have similar copyright durations, typically the creator's lifetime plus 50-70 years. If the author's country has a reciprocal agreement with India, the copyright duration might be recognized in India.
शिवपूजन सहाय के जीवन में प्रकाशित 'शिवपूजन रचनावली'(४ खंड) का (c ) लेखक ने स्वयं परिषद के साथ निबंधित किया था जो अब न्यास के साथ परिवर्त्तित है ओर उसकी रॉयल्टी न्यास को मिलती है। न्यास का निबंधन अप्रैल, १९९३ में हुआ था जिसमें शिवपूजन सहाय की चार स्वत्वाधिकारी संतानों ने लेखक के सम्पूर्ण प्रकाशित-अप्रकाशित लेखन का (c ) न्यास को समर्पित कर दिया था जिसके अंतर्गत शिवपूजन सहाय का सम्पूर्ण प्रकाशित-अप्रकाशित साहित्य अंतिम संपादित प्रामाणिक रूप में 'शिवपूजन सहाय साहित्य समग्र'(१० खंड, २०११ ) में प्रकाशित हो चुका है, ओर उसमें प्रकाशित (लेखक के निधन के बाद में प्रकाशित सामग्री) को अनधिकृत रूप से प्रकाशित करना अवैधानिक माना जाएगा | परंतु वर्त्तमान परिस्थितियों में लेखक के साहित्य के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से न्यास इस दिशा में कोई वैधानिक कार्रवाई न करके, केवल इतना ही कहना चाहता है कि जो भी पूर्व-अप्रकाशित सामग्री 'समग्र' में से लेकर प्रकाशित की जाए उसे (१) यथावत शुद्ध प्रकाशित किया जाए और (२) पुस्तक कि भूमिका में न्यास के प्रति सदाशयतापूर्वक आभार व्यक्त किया जाए, जिससे हिन्दी में एक स्वस्थ परंपरा चल सकेगी।
जयंती 133 के अवसर पर न्यास के इस अधीकृत ब्लॉग shivapoojan.blogspot.com पर जो सामग्री उपलब्ध है उसके अलावा कुछ
नई सामग्री दो और सम्बद्ध ब्लॉगों पर भी देखी जा सकती है – vibhutimurty.blogspot.com
तथा vagishwari.blogspot.com
आ.शिवजी पर नेट पर भी बहुत सामग्री उपलब्ध है। न्यास का अपना youtube channel भी है vagishwarimurty जिस पर बहुत सी चीजें देखी जा
सकती हैं। नेट में ajaynarayan.com पर ‘शिवपूजन
सहाय साहित्य समग्र’ के दसों खंडों की सामग्री और उनसे जुड़ी बहुत सी पुस्तकें e-book पर क्लिक करके निःशुल्क पढ़ी जा सकती हैं।
न्यास की गतिविधियों ओर प्रस्तावित कार्यक्रमों कि सूचना अब इसी ब्लॉग पर आधिकारिक रूप से उपलब्ध होगी। कृपया comments में अपने सुझाव/विचार अवश्य अंकित करें। आ. शिवजी पर हो रहे शोध की एक सूची हम यहाँ प्रकाशित करेंगे। उस विषय में सूचनाओं का स्वागत है। आ.शिवजी से सम्बद्ध अन्यत्र हो रही गतिविधियों कि सूचन यदि नीचे लिखे संपक-सूत्र पर भेजी जा सकें तो न्यास उन्हें चित्रों ओर विडिओ के साथ प्रकाशित कर आभारी होगा।
सम्पर्क : bsmmurty@gmail Mob.+91-7752922938/9415336674










































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